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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 24, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पेसा कानून लागू करने नक्सलियों ने लगाए पोस्टर

कोयलीबेड़ा जाने वाली सड़क पर ग्राम सुलंगी के समीप हनुमान टेकरी में पेड़ गिराकर नक्सलियों ने बांधा बैनर। कुछ समय से शांत बैठे नक्सलियों की हलचल क्षेत्र मे...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Wed, 24 Aug 2022 01:22:14 AM (IST)Updated Date: Wed, 24 Aug 2022 01:22:14 AM (IST)
पेसा कानून लागू करने नक्सलियों ने लगाए पोस्टर

अंतागढ़। अंतागढ़ ब्लाक मुख्यालय से कोयलीबेड़ा जाने वाली सड़क पर ग्राम सुलंगी के समीप हनुमान टेकरी में पेड़ गिराकर नक्सलियों ने बांधा बैनर। कुछ समय से शांत बैठे नक्सलियों की हलचल क्षेत्र में बढ़ रही है, कुछ ही दिनों पूर्व पखांजूर क्षेत्र में पूर्व विधायक अनूप नाग, पूर्व विधायक विक्रम उसेंडी साथ ही पूर्व विधायक भोजराज नाग का विरोध नक्सली पोस्टरों के माध्यम से कर चुके हैं।

वहीं आज मिले पोस्टरों में पेशा कानून लगाने सहित जल जंगल जमीन से संबंधित बातें लिखी गई हैं। अंतागढ़ के एडिशनल एस पी खोमान सिन्हा ने बताया कि पुलिस व सुरक्षा बलों ने जानकारी मिलते ही बैनर पोस्टर निकाल दिए, इन बैनरों में जल जंगल जमीन, पेसा कानून साथ ही भू संरक्षण अधिनियम के संबंध में बातें लिखी गई हैं।


कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

आदिवासियों के हितों पर विपरीत प्रभाव डालने वाले सामाजिक मुद्दों पर कांग्रेस विधायकों का प्रतिनिधि मंडल राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। जिसमें उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्रीय पर्यावरण एवं जल वायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 28 जून 2022 के अधिसूचना क्रमांक 459 को छत्तीसगढ़ में लागू होने से रोकने के लिए संविधान के अनुक्षेत्र 244 (1) और पांचवी अनुसूची की कण्डिका पांच के तहत विशेषाधिकार का प्रयोग करने हेतु राज्यपाल से मांग किया गया है, उक्त नियम के लागू होने से अनुसूचित क्षेत्रों में लागू, पेशा कानून एवं वन अधिकार कानून 2006 के प्रावधानों का उल्लघंन होगा, इसलिए उक्त नियम को छत्तीसगढ़ में लागू होने से रोकने के लिए विधानसभा में शासकीय संकल्प पारित कर केन्द्र सरकार को पूर्व में पत्र प्रेषित किया जा चुका है

भारतीय संविधान के अनुसार अनुसूचित जनजाति की सूची तैयार करने के पूर्व अधिसूचना प्रकाशित की जाती है जिससे जाति के आधार पर आरक्षण एवं अन्य सुविधाओं का प्रावधान किया जाता है। प्रत्येक 10 वर्ष में केन्द्र सरकार के द्वारा जनगणना की जाती है जिसमें धर्म के आधार पर व्यक्तियों की संख्या सुनिश्चित की जाती है। ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को आदिवासियों के लिए पृृथक से धर्म कोड आबंटित किये जाने हेतु भारत सरकार से मांग किया गया है कि जिससे जनजातीय समाज की वास्तविक संख्या ज्ञात हो सके।